विज्ञान आज के युग की सबसे बड़ी शक्ति - मनमीत छाबड़ा

क्षेत्र के वैज्ञानिक गौरव चंद्राकर ने विभिन्न वैज्ञानिक मॉडलों और रोचक प्रयोगों का किया प्रदर्शन।


पिथौरा। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर स्थानीय शासकीय अंग्रेजी मिडिल विद्यालय पिथौरा में वैज्ञानिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना, वैज्ञानिक सोच विकसित करना और प्रयोगों के माध्यम से सीखने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना रहा। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला और विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर सहभागिता की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद प्रतिनिधि एवं भाजपा जिला कार्य समिति के सदस्य मनमीत सिंह छाबड़ा उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान आज के युग की सबसे बड़ी शक्ति है, जो जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने, प्रश्न पूछने और प्रयोगों के माध्यम से सीखने की आदत विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर ही समाज और राष्ट्र निरंतर प्रगति कर सकते हैं।

विद्यालय के प्रधान पाठक पुष्कांत साहू ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर विज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझने का अवसर देती हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान आधारित गतिविधियां बच्चों की रचनात्मकता और तार्किक क्षमता को मजबूत बनाती हैं।

कार्यक्रम में शिक्षिका द्वय श्रीमती मनमीत कौर एवं श्रीमती गुरप्रीत कौर भी उपस्थित रहीं और उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में क्षेत्र के वैज्ञानिक गौरव चंद्राकर ने विभिन्न वैज्ञानिक मॉडलों और रोचक प्रयोगों का प्रदर्शन किया। उन्होंने ऊर्जा, प्रकाश, गति और अन्य वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया। विद्यार्थियों ने प्रयोगों को बड़े उत्साह से देखा और उनसे जुड़े प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रयोगों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया ने उन्हें विज्ञान के प्रति और अधिक प्रेरित किया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि विज्ञान केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन का अभिन्न हिस्सा है।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं शिक्षकों ने ऐसे आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना का विकास हो और वे भविष्य में नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकें। कुल मिलाकर यह वैज्ञानिक जागरूकता कार्यशाला ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और सफल रही।

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