महासमुंद में 1.5 करोड़ के एलपीजी गैस गबन कांड का बड़ा खुलासा, खाद्य अधिकारी समेत तीन गिरफ्तार।
महासमुंद। जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल से कथित रूप से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की गैस हेराफेरी मामले में महासमुंद पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए जिला खाद्य अधिकारी सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि जब्त गैस कैप्सूलों को सुरक्षित रखने के नाम पर एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा गया, जिसमें खाद्य अधिकारी, गैस एजेंसी संचालक और निजी कारोबारी की मिलीभगत से गैस के गबन की पूरी पटकथा लिखी गई थी।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे कथित षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव को माना जा रहा है, जिसने गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के साथ मिलकर करोड़ों की गैस हेराफेरी की योजना बनाई। वहीं रायपुर निवासी मनीष चौधरी को कथित तौर पर उपयुक्त एजेंसी तलाशने और पूरी डील को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी दी गई थी।
कैसे शुरू हुई करोड़ों की साजिश?
पुलिस जांच के मुताबिक, थाना सिंघोड़ा में दिसंबर 2025 में छह एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। भीषण गर्मी और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर खाद्य विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद 30 मार्च 2026 को उक्त गैस कैप्सूलों को रायपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष सिंह ठाकुर को सुपुर्द किया गया।
इसी सुपुर्दनामा प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर षड्यंत्र की शुरुआत हुई। जांच में सामने आया कि 23 मार्च को खाद्य अधिकारी अजय यादव और गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के बीच पहली गोपनीय बैठक हुई, जिसमें जब्त गैस को बेचकर करीब एक करोड़ रुपये की उगाही की योजना बनाई गई।
सिंघोड़ा जाकर किया गया गैस का आकलन
पुलिस का दावा है कि 26 मार्च को खाद्य अधिकारी अजय यादव और पंकज चंद्राकर स्वयं सिंघोड़ा थाना पहुंचे और छह कैप्सूलों में मौजूद गैस की मात्रा का अनुमान लगाया। करीब 102 से 105 मीट्रिक टन गैस उपलब्ध होने का आंकलन करने के बाद कथित रूप से एक करोड़ रुपये की डील तय करने की योजना बनाई गई।
इसके बाद विभिन्न गैस एजेंसियों से बातचीत शुरू हुई, लेकिन अंततः ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ 80 लाख रुपये में कथित सौदा तय किया गया। जांच में दावा किया गया है कि इस राशि में से 50 लाख रुपये खाद्य अधिकारी अजय यादव, 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर और 10 लाख रुपये मनीष चौधरी के हिस्से में तय हुए थे।
सुपुर्दनामा और फर्जी दस्तावेजों का खेल
पुलिस के मुताबिक, षड्यंत्र को सफल बनाने के लिए सुपुर्दनामा प्रक्रिया में भी कथित अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि खाद्य विभाग के कर्मचारियों को कागजात में हस्ताक्षर नहीं करने और कैप्सूलों का वास्तविक वजन नहीं कराने के निर्देश दिए गए। पुलिस को गुमराह करते हुए बिना सही माप-तौल के प्रक्रिया पूरी की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि सुपुर्दनामा के बाद एक सप्ताह के भीतर छह कैप्सूलों से करीब 92 टन गैस निकाल ली गई। बाद में 6 और 8 अप्रैल को खाली कैप्सूलों का वजन कराया गया, लेकिन कथित रूप से वजन पंचनामा पहले ही तैयार कर कार्यालय में हस्ताक्षर करा लिए गए थे। पुलिस का आरोप है कि यह पंचनामा वास्तविक प्रक्रिया से पहले तैयार किया गया था और कलेक्टोरेट में जमा भी कर दिया गया था।
30 लाख रुपये “श्योरिटी” के रूप में खाते में ट्रांसफर
पुलिस जांच में कथित वित्तीय लेन-देन का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, 50 लाख रुपये कथित तौर पर खाद्य अधिकारी अजय यादव को सुपुर्दनामा के अगले ही दिन पहुंचा दिए गए थे। वहीं शेष 30 लाख रुपये नकद मिलने में देरी होने पर ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स से मनीष चौधरी के खाते में “श्योरिटी” के रूप में रकम ट्रांसफर कराई गई, जिसे बाद में वापस लौटा दिया गया।
40 सदस्यीय टीम की जांच से खुला राज
महासमुंद पुलिस ने बताया कि करीब 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक लगातार तकनीकी विश्लेषण, सीडीआर जांच, वैज्ञानिक पूछताछ और सूक्ष्म विवेचना कर मामले का खुलासा किया। पूर्व की तकनीकी जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया था कि सभी गैस कैप्सूल मैकेनिकल रूप से फिट थे और इतने बड़े स्तर पर गैस लीकेज व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।
तीन आरोपी गिरफ्तार, कई धाराओं में मामला दर्ज
इस मामले में पुलिस ने पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, नगदी और अन्य सामान सहित करीब 6 लाख 11 हजार 700 रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक न्यास भंग, आपराधिक षड्यंत्र, कूट रचना, शासकीय संपत्ति की हेराफेरी और कालाबाजारी सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले ने प्रशासनिक महकमे में भी हलचल मचा दी है। करोड़ों की गैस हेराफेरी और सरकारी सिस्टम में कथित मिलीभगत के खुलासे के बाद आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
