महासमुंद में करोड़ों के अवैध मिनरल ट्रेड का खुलासा, स्पंज आयरन की चोरी और फर्जी बिलिंग का बड़ा खेल उजागर।

टोल जांच में खुली बड़ी साजिश: 106 करोड़ से अधिक के फर्जी कारोबार की जांच में कई कंपनियां घेरे में।


महासमुंद। जिले में टोल प्लाजा पर ट्रकों की जांच के दौरान करोड़ों रुपये के अवैध मिनरल ट्रेड का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस जांच में स्पंज आयरन की चोरी, फर्जी बिलिंग और हवाला लेन-देन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई कंपनियां और अन्य आरोपी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 25 फरवरी 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ट्रक क्रमांक सीजी 04 जेसी 4585 और सीजी 07 एवी 5290 के माध्यम से अवैध रूप से स्पंज आयरन का परिवहन किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने ट्रकों को रोककर जांच की, जहां चालक सोनूलाल मोंगरे और रामेश्वर मानिकपुरी से माल के दस्तावेज मांगे गए। दोनों चालक वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद स्पंज आयरन को धारा 106 बीएनएसएस के तहत जब्त कर लिया गया।

मामले की आगे की जांच में सामने आया कि आरोपी रंजीत सिंह (45 वर्ष) निवासी लोहराचट्टी थाना सोहेला जिला बरगढ़ (ओडिशा) अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से विभिन्न ट्रकों से चोरी किए गए स्पंज आयरन को अवैध रूप से भंडारित कर कूटरचित बिलों के माध्यम से रायपुर उरला तक परिवहन करवा रहा था। इस संबंध में थाना बसना में अपराध क्रमांक 84/26 के तहत धारा 318(4), 316(4), 317(2), 336(2), 338, 340, 3(5) बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज कर सोनूलाल मोंगरे, रामेश्वर मानिकपुरी और रंजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया।

जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह भी सामने आया कि रायगढ़ जिले की एक इस्पात कंपनी के संचालक तारक घोष द्वारा फर्जी बिल उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस टीम ने रायगढ़ के गढ़उमरिया (पुसौर) स्थित इस्पात फर्म में जांच की, जहां फर्म की गतिविधियों में संलिप्तता पाए जाने पर कंपनी संचालक तारक घोष (56 वर्ष) निवासी शांति विहार कॉलोनी, माझापारा रैताराई जिला रायगढ़ को 8 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया।

प्रारंभिक जांच और दस्तावेजों के आधार पर यह मामला लगभग 106 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध कारोबार से जुड़ा पाया गया है। पुलिस के अनुसार मासिक वेतन पर कार्यरत तीन कर्मचारियों के नाम पर सेल कंपनियां बनाकर फर्जी इनवॉइस तैयार किए जाते थे और इन्हीं के माध्यम से चोरी किए गए स्पंज आयरन का परिवहन और व्यापार किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों द्वारा बड़े स्तर पर हवाला के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया जा रहा था। स्पंज आयरन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने और अवैध भंडारण के लिए विभिन्न कंपनियों के फर्जी बिलों का इस्तेमाल किया जाता था।

पुलिस ने इस मामले की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की है, जो पूरे नेटवर्क, कंपनियों और संभावित अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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