महासमुंद में नक्सलियों का आत्मसमर्पण शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि।
महासमुंद। जिले में नक्सल प्रभावित क्षेत्र से जुड़े नक्सलियों द्वारा मुख्यधारा में लौटते हुए आत्मसमर्पण किया जाना न केवल महासमुंद बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं सकारात्मक उपलब्धि है। यह बदलते माहौल, मजबूत शासन व्यवस्था और जनविश्वास का स्पष्ट प्रमाण है कि अब भटके हुए लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय ले रहे है।
सांसद प्रतिनिधि एवं भाजपा जिला कार्य समिति सदस्य मनमीत सिंह छाबड़ा ने इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम का स्वागत करते हुए कहा कि यह सफलता केंद्रीय गृह मंत्री माननीय अमित शाह के सशक्त नेतृत्व, दूरदर्शी नीति और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रभावी मार्गदर्शन में चल रही सख्त लेकिन संवेदनशील रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित कार्ययोजना, सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई, नक्सलियों के आर्थिक तंत्र पर लगातार प्रहार, दूरस्थ क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, तथा आत्मसमर्पण और पुनर्वास की मानवीय एवं व्यवहारिक नीति ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास का नया वातावरण तैयार किया है। यही कारण है कि आज अधिक से अधिक लोग हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति और विकास की राह चुन रहे है।
मनमीत छाबड़ा ने कहा कि वर्षों तक नक्सलवाद ने क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक प्रगति को बाधित किया। अनेक गांव भय और असुरक्षा के वातावरण में जीने को मजबूर थे। लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार होने से लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है और युवाओं के सामने नए अवसर खुल रहे है।
उन्होंने कहा कि माननीय अमित शाह जी के नेतृत्व में देश को नक्सलमुक्त बनाने का जो संकल्प लिया गया है, वह अब वास्तविकता के रूप में सामने आ रहा है। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। इसका परिणाम यह है कि जो क्षेत्र कभी नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता था, वहां आज शांति, विश्वास और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।
श्री छाबड़ा ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के इस निर्णय को साहसिक और सकारात्मक बताते हुए कहा कि सरकार की मंशा केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि भटके हुए लोगों को मुख्यधारा में वापस लाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन का अवसर देना है। आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास, रोजगार, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्स्थापन के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि शांति और विकास एक-दूसरे के पूरक है। जहां शांति होती है, वहीं विकास संभव होता है, और जहां विकास पहुंचता है, वहां हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं बचता। महासमुंद में हुआ यह आत्मसमर्पण इसी सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।
मनमीत छाबड़ा ने सुरक्षा बलों, पुलिस प्रशासन, खुफिया एजेंसियों तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक संकल्प, निरंतर प्रयास और मजबूत नेतृत्व का परिणाम है।
उन्होंने अन्य भटके हुए युवाओं से भी भावुक अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा और भ्रम के रास्ते को छोड़कर शांति, विकास और राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जुड़ें। लोकतंत्र सभी को अवसर देता है और सरकार हर उस व्यक्ति का स्वागत करती है जो हथियार छोड़कर समाज की प्रगति में भागीदारी निभाना चाहता है।
श्री छाबड़ा ने विश्वास व्यक्त किया कि दृढ़ नेतृत्व, प्रभावी नीति और जनसहभागिता के बल पर महासमुंद सहित पूरा क्षेत्र स्थायी शांति, समृद्धि और सर्वांगीण विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा और आने वाला समय नई संभावनाओं और प्रगति का साक्षी बनेगा।
