पिथौरा वनपरिक्षेत्र में गरिमामय समारोह, अधिकारी-कर्मचारियों ने किया सालिकराम डड़सेना का सम्मान।

 वन सेवा के 41 वर्षों का सम्मान, सालिकराम डड़सेना को भावभीनी विदाई।

पिथौरा | 31 जनवरी | पिथौरा वनपरिक्षेत्र में पदस्थ उपवनक्षेत्रपाल सालिकराम डड़सेना के सेवानिवृत्त होने पर 31 जनवरी को एक गरिमामय विदाई-कम-सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय वनपरिक्षेत्र कार्यालय परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ-साथ न्यायिक, सामाजिक एवं साहित्यिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वयं सेवानिवृत्त अधिकारी सालिकराम डड़सेना रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती संतोषी डड़सेना उपस्थित रहीं। समारोह की अध्यक्षता संयुक्त वनमंडलाधिकारी सरायपाली यू.आर. बंसत ने की।

कार्यक्रम के अतिविशिष्ट अतिथियों में न्यायिक मजिस्ट्रेट पिथौरा शौरभ बारा एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट बसना मंजीत जांगड़े शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त अतिथियों में सेवानिवृत्त सहायक वनसंरक्षक आर.पी. साहू, संयुक्त वनमंडलाधिकारी पिथौरा सुश्री डिम्पी बैस, सेवानिवृत्त रेंजर बी.आर. खुंटे, विजय शंकर साहू, अभिराम साहू, तोषराम सिन्हा, पिथौरा रेंज के नवपदस्थ प्रभारी रेंजर सुखराम निराला तथा पिथौरा नगर की पार्षद श्रीमती रामकुंवर सिन्हा विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

समारोह के दौरान वक्ताओं ने श्री डड़सेना के कार्यकाल में किए गए उल्लेखनीय कार्यों, उनके अनुशासित नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा एवं सरल व्यक्तित्व की जमकर सराहना की। मंचासीन अतिथियों के अतिरिक्त श्रृंखला साहित्य मंच से प्रवीण प्रवाह, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष उमेश दीक्षित, सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर रमेश सिंह ठाकुर सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए उनके सेवाकाल को प्रेरणादायी बताया।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर रतन सिंह डड़सेना ने सालिकराम डड़सेना के जन्म से लेकर सेवानिवृत्ति तक के जीवन-परिचय, व्यक्तित्व, कार्यशैली एवं सेवा यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए विस्तृत विवरण का वाचन किया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने भावपूर्वक सुना।

मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में सालिकराम डड़सेना भावुक हो उठे। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने सेवा जीवन की शुरुआत वर्ष 1983 में काष्ठागार पिथौरा में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में की थी। इसके पश्चात वर्ष 1990 में वनरक्षक, 2012 में वनपाल तथा 2018 में उपवनक्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नत हुए।

उन्होंने अपने लंबे सेवाकाल के दौरान बस्तर के चारामा, कांकेर, भानुप्रतापपुर, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, बलौदाबाजार के बारनवापारा क्षेत्र अंतर्गत चरौदा एवं देवपुर, इसके अलावा महासमुंद, कसडोल सहित विभिन्न क्षेत्रों में रेंजर के रूप में सेवाएं देने की जानकारी दी।

श्री डड़सेना ने बताया कि वे प्रारंभ से ही भारतीय मजदूर संघ से सक्रिय रूप से जुड़े रहे और अविभाजित जिला रायपुर में अरुण कुमार चौबे के मार्गदर्शन में संगठन का नेतृत्व किया। उन्होंने नागदा, बैंगलोर, दिल्ली, भोपाल सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित भारतीय मजदूर संघ के अधिवेशनों में सहभागिता की तथा संगठन के माध्यम से सैकड़ों कर्मचारियों को नियमित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शासकीय दायित्वों के साथ-साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ में महासमुंद जिले के लगातार 10 वर्षों तक जिला अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके अतिरिक्त रायपुर संभाग एवं प्रांतीय स्तर पर भी संघ का नेतृत्व किया।

सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वे सिन्हा कलार समाज के पिथौरा मंडलेश्वर जिला अध्यक्ष तथा वर्तमान में समाज की प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

सेवानिवृत्ति के अवसर पर मिले इस गरिमामय सम्मान को उन्होंने अपने संपूर्ण सेवा कार्यकाल की उपलब्धियों का परिणाम बताते हुए इसे अपने जीवन की अमूल्य निधि बताया और भावुक हो गए।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने श्री डड़सेना के सुखद, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए उनके नए जीवन की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं एवं बधाई दी।

कार्यक्रम का संचालन शिक्षा जगत के संकुलन प्रभारी राजाराम पटेल द्वारा किया गया, जबकि आभार प्रदर्शन डिप्टी रेंजर ननकुसिया साहू ने किया।

इस अवसर पर श्री डड़सेना के साथ-साथ वनरक्षक प्रशिक्षण शाला के वनपाल मो. शफी को भी शाल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महासमुंद के रेंजर सियाराम कर्मकार, डिप्टी रेंजर सतीश पटेल, ललित पटेल, राजकुमार साहू, वीरेंद्र पाठक, छबिराम साहू, श्रीमती शुशीला साहू सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एवं अन्य विभागों के कर्मचारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सेवानिवृत्त अधिकारी को शुभकामनाएं दीं।

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