महासमुंद : बगारपाली जंगल में 10 जंगली सुअरों की मौत से हड़कंप, जांच में लापरवाही उजागर—कार्रवाई अब भी लंबित।

शिकार की पुष्टि के बाद 8 शव बरामद, फॉरेस्ट गार्ड-डिप्टी रेंजर की भूमिका पर सवाल—डीएफओ बोले, नियमों के अनुसार होगी कार्रवाई।



पिथौरा | महासमुंद

महासमुंद वनमंडल के पिथौरा वनपरिक्षेत्र अंतर्गत बगारपाली वन कक्ष क्रमांक 211 एवं 212 में सिलसिलेवार 10 जंगली सुअरों की मौत की खबर से वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। 3 फरवरी 2026 को इस मामले की शिकायत प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय तक पहुंचने के बाद वन विभाग हरकत में आया और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू हुई।

प्राथमिक जांच में सामने आया कि संरक्षित क्षेत्र के भीतर अलग-अलग स्थानों पर जंगली सुअरों के शव गड्ढे खोदकर दफनाए गए थे। जांच के दौरान अब तक 10 में से 8 स्थानों से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के बाद फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। मौत के कारणों का अंतिम खुलासा रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

मामले में स्थानीय वन अमले की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि फॉरेस्ट गार्ड दिलेश्वरी दीवान को घटना की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने उच्च अधिकारियों को सूचना नहीं दी और मृत जंगली सुअरों को चौकीदारों के माध्यम से जंगल में ही दफन करा दिया। इससे विभाग के भीतर मिलीभगत की आशंका और गहरी हो गई है।

इसी तरह डिप्टी रेंजर छबीराम साहू की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में नियमित गश्त और निगरानी की कमी को इस बड़ी घटना की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। इतने बड़े पैमाने पर अवैध शिकार होने के बावजूद रेंजर से लेकर एसडीओ और डीएफओ स्तर तक समय पर सूचना न पहुंचना विभागीय समन्वय पर सवाल खड़े करता है।




डीएफओ महासमुंद मयंक पाण्डेय ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विभागीय कार्रवाई नियम और प्रक्रिया के अनुसार ही की जाएगी और जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जाएगा। हालांकि घटना सामने आने के बाद कई दिन बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई न होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

इस बीच मुख्य वनसंरक्षक वन वृत्त रायपुर द्वारा भी पूरे घटनाक्रम का निरीक्षण किया गया है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि उच्च स्तर के निर्देशों के बाद दोषियों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई होती है या मामला फाइलों तक सीमित रह जाता है।

बगारपाली के जंगल में हुई इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीव सुरक्षा और वन अमले की जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि जांच के बाद विभाग दोषियों तक पहुंचकर कड़ी कार्रवाई कर पाता है या नहीं।

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