पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अरुण कुमार पाण्डेय की सीधी निगरानी में जांच, डीएफओ को सूक्ष्म जांच के निर्देश।
पिथौरा | महासमुंद
महासमुंद वनमंडल अंतर्गत वनपरिक्षेत्र पिथौरा के बगारपाली संरक्षित सिंचित प्लांटेशन रोपड़ी कक्ष क्रमांक 212 एवं उससे सटे एन.आर. वन क्षेत्र में एक साथ लगभग 10 जंगली सुअरों के अवैध शिकार की सनसनीखेज घटना सामने आई है। आरोपियों द्वारा इस गंभीर वन्य अपराध के साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से मृत जंगली सुअरों को जमीन में गड्ढा खोदकर दफन कर दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे महासमुंद वनमंडल में हड़कंप मच गया है।
“अवैध शिकार की परतें खोलने एसडीओ डिम्पी बैस के नेतृत्व में रात के अंधेरे में मौके पर जांच करती वन विभाग की टीम।”
यह मामला इसलिए भी अत्यंत गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह घटना कंटीली फेंसिंग तार से सुरक्षित सिंचित प्लांटेशन के भीतर घटित हुई है, जहाँ बिना विभागीय संलिप्तता के इस तरह का सामूहिक शिकार किया जाना लगभग असंभव माना जा रहा है। इतना ही नहीं, किसी भी राजपत्रित अधिकारी को सूचना दिए बिना और बिना पोस्टमार्टम के मृत जंगली सुअरों को दफन कर देना प्रथम दृष्टया वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का घोर उल्लंघन है।
गड्ढा क्रमांक 01
इस पूरी घटना ने वनपरिक्षेत्र पिथौरा के विभिन्न उपपरिक्षेत्रों में पदस्थ वन अमले की कार्यप्रणाली और वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय फॉरेस्ट गार्ड एवं डिप्टी रेंजर को घटना की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इस अतिसंवेदनशील मामले को अपने उच्च अधिकारियों से छुपाए रखा और विभाग को सूचित करने की कोई पहल नहीं की, जिससे विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका और प्रबल हो गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक छत्तीसगढ़ अरुण कुमार पाण्डेय ने स्वयं इस प्रकरण की सीधी निगरानी शुरू कर दी है। शिकायत के पश्चात वनमंडलाधिकारी महासमुंद मयंक पाण्डेय को मामले की गहन एवं सूक्ष्म जांच के निर्देश दिए गए हैं। उच्च स्तरीय आदेश के बाद पिथौरा उपवनमंडलाधिकारी (एसडीओ) डिम्पी बैस ने रातों-रात मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और जांच में जुट गई हैं। घटना की तह तक पहुंचने के लिए डॉग स्क्वायड भी बुलाया जा रहा है।
गड्ढा क्रमांक 02 -
यह प्रकरण इसलिए और भी संवेदनशील हो जाता है क्योंकि शासन द्वारा वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण के लिए हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाता है। ऐसे में यदि रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो वन्यजीवों और जंगलों की सुरक्षा पर विश्वास करना कठिन हो जाता है। यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई और संलिप्त कर्मचारियों को बर्खास्त नहीं किया गया, तो भविष्य में इस तरह के अपराध और बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
गड्ढा क्रमांक 03 -
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में कितने आरोपी सामने आते हैं, अवैध शिकार का वास्तविक आंकड़ा क्या निकलता है, और क्या विभाग वास्तविक अपराधियों तक पहुंच पाता है या नहीं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वन्यजीवों और पर्यावरण का विनाश यूं ही जारी रहेगा। ऐसे में राज्य एवं केंद्र सरकार को वन्यप्राणियों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए और अधिक कड़े एवं प्रभावी कानून बनाने की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगल और जीव-जगत सुरक्षित रह सके।
गड्ढा क्रमांक 04 -
गौरतलब है कि इस पूरे मामले की जांच पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अरुण कुमार पाण्डेय की विशेष निगरानी में जारी है।







