कृषि मजदूरी करने वाले पिता के संघर्ष और बेटेकी मेहनत ने लिखी सफलता की कहानी, ग्रामीणों ने कंधे पर बैठाकर किया भव्य स्वागत।
कोमाखान/महासमुन्द। देश सेवा का जज्बा और कुछ कर गुजरने का संकल्प हो तो कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। इस बात को सच साबित किया है ग्राम वन भलेसर, कोमाखान क्षेत्र के युवा प्रीतम सिंह ठाकुर ने। प्रीतम का चयन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में हुआ है। छह महीने का कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब वे पहली बार CRPF की गौरवशाली वर्दी पहनकर अपने गृहग्राम पहुंचे, तो पूरा गांव खुशी और गर्व से झूम उठा।
प्रीतम के गांव पहुंचते ही परिजनों, मित्रों और ग्रामीणों ने डीजे, ढोल-नगाड़ों और बाजे-गाजे के साथ जोरदार स्वागत किया। ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया। खुशी का आलम ऐसा था कि युवाओं और बुजुर्गों ने प्रीतम को कंधे पर बैठाकर अपनी खुशी का इजहार किया। गांव की गलियों में देश सेवा के लिए चयनित अपने बेटे के स्वागत का उत्साह साफ नजर आया।
संघर्षों के बीच पिता ने बेटे के सपनों को दी उड़ान
प्रीतम सिंह ठाकुर स्वर्गीय जोधन सिंह ठाकुर एवं माता भुखई बाई ठाकुर के सुपुत्र हैं। उनका जीवन बेहद सामान्य पारिवारिक परिस्थितियों में बीता। परिवार के भरण-पोषण के लिए उनके पिता कृषि मजदूरी करते थे। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने प्रीतम की पढ़ाई और उनके सपनों के रास्ते में कोई कमी नहीं आने दी।
पारिवारिक संघर्षों को करीब से देखने वाले प्रीतम ने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय मेहनत को अपना हथियार बनाया। लगातार प्रयास, अनुशासन और देश सेवा के जज्बे के बल पर उन्होंने CRPF में चयन हासिल कर अपने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव का गौरव बढ़ाया।
छह महीने के कठिन प्रशिक्षण के बाद पहली बार वर्दी में लौटे गांव
CRPF में चयन के बाद प्रीतम ने तमिलनाडु में छह महीने का कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान शारीरिक क्षमता, अनुशासन और सुरक्षा संबंधी विभिन्न चुनौतियों से गुजरने के बाद जब वे पहली बार CRPF की वर्दी पहनकर अपने गांव पहुंचे, तो उनके स्वागत के लिए ग्रामीण पहले से ही उत्साहित थे।
प्रीतम को वर्दी में देखकर परिजनों की खुशी और ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बन रहा था। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पुष्पवर्षा और जयघोष के बीच ग्रामीणों ने उनका आत्मीय स्वागत किया।
“यह सिर्फ परिवार नहीं, पूरे अंचल की सफलता”
स्वागत के दौरान ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि जिस मिट्टी में प्रीतम पले-बढ़े, आज उसी मिट्टी पर देश की वर्दी पहनकर उनका लौटना पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण है। यह उपलब्धि केवल प्रीतम और उनके परिवार की सफलता नहीं, बल्कि पूरे भलेसर और आसपास के क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रीतम की सफलता गांव के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद सरकारी सेवा और देश की सुरक्षा में योगदान देने का सपना देखते हैं।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
साधारण किसान-मजदूर परिवार से निकलकर CRPF जैसी प्रतिष्ठित सुरक्षा सेवा में चयनित होना प्रीतम की मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि संसाधनों की कमी सफलता में बाधा नहीं, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे।
ग्रामीणों ने प्रीतम के उज्ज्वल भविष्य, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वे आगे भी पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ देश की सेवा करते हुए भलेसर और महासमुन्द जिले का नाम रोशन करेंगे।
प्रीतम की यह सफलता आज भलेसर की गलियों में सिर्फ एक बेटे के स्वागत की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और देशभक्ति से सफलता हासिल करने की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।




