पिथौरा में अवैध निर्माण में अधिकारियों की संलिप्तता का आरोप, पूर्व शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं होने का दावा।
पिथौरा। शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। पिथौरा निवासी युवराज माणिकपुरी ने कलेक्टर महासमुंद को विस्तृत शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर मकान का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
आवेदन के अनुसार, वर्ष 1988-89 में पिथौरा कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी के नाम दर्ज खसरा नंबर-4, रकबा 1.30 हेक्टेयर की भूमि से लगी लगभग 47×50 फीट (2350 वर्गफीट) शासकीय भूमि पर पत्थर की नींव डालकर कब्जा किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उक्त भूमि पर तेजी से मकान निर्माण कराया जा रहा है, जो अब लगभग पूरा होने की स्थिति में है।
शिकायत में कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा पहले भी आसपास की भूमि पर निर्माण कर कब्जा किया जा चुका है। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने तहसीलदार पिथौरा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर स्थगन आदेश प्राप्त किया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी है। आरोप है कि तहसील प्रशासन ने आदेश के पालन को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे अतिक्रमण करने वालों के हौसले बढ़े हैं।
युवराज माणिकपुरी ने आवेदन में उल्लेख किया है कि 3 जुलाई 2026 को कलेक्टर कार्यालय में शिकायत करने के बाद संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को पत्र जारी किया गया था, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा 13 जुलाई 2026 को कोऑपरेटिव प्रक्रिया एवं विपणन संस्था, पिथौरा के माध्यम से तहसीलदार को भी अवैध निर्माण रोकने तथा अतिक्रमण हटाने के लिए आवेदन दिया गया, किंतु उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता के कारण अवैध निर्माण जारी है। इससे न केवल शासकीय भूमि पर कब्जा हो रहा है, बल्कि आम लोगों का प्रशासन पर भरोसा भी कमजोर हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमण करने वालों के हौसले बुलंद हैं और उनका परिवार मानसिक रूप से परेशान है।
आवेदन में कलेक्टर से मांग की गई है कि अवैध निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए, शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्तियों एवं लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए।
