"लाखों के रंग-रोगन के बाद भी वन विभाग परिसर में शराब की बोतलों का अंबार! आखिर किसकी निगरानी में चल रहा यह खेल?"



"मरम्मत पर लाखों खर्च, लेकिन कैंपस में गंदगी और शराब की शीशियां! पिथौरा वन विभाग पर उठे गंभीर सवाल"


पिथौरा से विशेष रिपोर्ट

पिथौरा वन विभाग के रेंजर कार्यालय एवं एसडीओ कार्यालय परिसर की तस्वीरें इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक ओर विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और वन संपदा बचाने का संदेश दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर विभागीय परिसर के भीतर बड़ी संख्या में पड़ी शराब की खाली बोतलें और फैली गंदगी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।



सबसे बड़ा सवाल यह है कि अभी महज एक माह पूर्व ही कार्यालय परिसर में लाखों रुपये खर्च कर रंग-रोगन और मरम्मत कार्य कराया गया था। सरकारी रिकॉर्ड में रंगाई-पुताई और रखरखाव के नाम पर भारी भरकम राशि खर्च किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान परिसर के अंदर जगह-जगह शराब की खाली शीशियां, प्लास्टिक कचरा और अव्यवस्था दिखाई दी। ऐसे में आम नागरिकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मरम्मत और रंग-रोगन के लिए तो सरकारी खजाना खुल गया, लेकिन परिसर की साफ-सफाई के लिए सरकारी धन कम पड़ गया?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार्यालय परिसर की नियमित निगरानी होती तो इतनी बड़ी संख्या में शराब की बोतलें यहां दिखाई नहीं देतीं। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं परिसर को असामाजिक तत्वों ने अड्डा तो नहीं बना लिया है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

वन विभाग का परिसर कोई सार्वजनिक मैदान नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय है, जहां प्रतिदिन अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक अपने कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर के भीतर इस प्रकार की स्थिति विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रही है।



क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि कार्यालय परिसर में शराब की बोतलें कैसे पहुंचीं और इतने दिनों तक वहां पड़ी क्यों रहीं। साथ ही मरम्मत और रंग-रोगन कार्य में खर्च हुई राशि की गुणवत्ता और उपयोगिता की भी जांच की जानी चाहिए।






ग्राउंड रिपोर्ट सामने आने के बाद अब लोगों की निगाहें प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। जनता जानना चाहती है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि कार्यालय परिसर की यह स्थिति है, तो आखिर जवाबदेही किसकी तय होगी?

जनता के सवाल

क्या रंग-रोगन के नाम पर खर्च हुई राशि का सही उपयोग हुआ?

क्या परिसर की नियमित सफाई और निगरानी होती है?

शराब की खाली बोतलें कार्यालय परिसर तक कैसे पहुंचीं?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?

क्या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?


"वन संरक्षण का संदेश देने वाले विभाग के परिसर में यदि शराब की शीशियां और गंदगी दिखाई दे रही है, तो यह केवल सफाई का नहीं बल्कि जवाबदेही का भी सवाल है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं?"

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