महासमुंद में LPG का बड़ा गबन कांड: सुपुर्दनामे के 6 कैप्सूल से 100 टन गैस गायब।

GPS ट्रैकिंग से खुली साजिश: 31 मार्च से 6 अप्रैल तक चरणबद्ध तरीके से खाली की गई गैस।


🟪 महासमुंद | 02 मई 2026

महासमुंद जिले में LPG गैस से जुड़े एक बड़े गबन मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सुरक्षित रखरखाव के लिए सुपुर्दनामे में दिए गए 6 एलपीजी कैप्सूल से करीब 90 से 100 मीट्रिक टन गैस, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये है, के गबन का मामला सामने आया है।

🔴 घटना का मूल आधार – सुपुर्दनामे से शुरू हुआ मामला

थाना सिंघोड़ा में दर्ज अपराध के तहत दिसंबर 2025 में 6 नग LPG गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को जप्त किया गया था। गर्मी के मौसम और सुरक्षा व्यवस्था की कमी को देखते हुए, इन कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर खाद्य विभाग की उपस्थिति में 30 मार्च 2026 को ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स, ग्राम उरला (अभनपुर, रायपुर) के संचालक संतोष सिंह ठाकुर को सुपुर्द किया गया।

घटना क्रम – कैसे खाली की गई गैस

जांच के दौरान सामने आया कि 31 मार्च से 6 अप्रैल 2026 के बीच सुनियोजित तरीके से सभी 6 कैप्सूल से गैस खाली की गई।

31 मार्च: 2 कैप्सूल

1 अप्रैल: 1 कैप्सूल

3 अप्रैल: 1 कैप्सूल

5 अप्रैल: 2 कैप्सूल

प्रत्येक कैप्सूल में औसतन 80 से 86 प्रतिशत LPG भरी हुई थी और प्रत्येक से लगभग 15 से 17 मीट्रिक टन गैस निकाली गई।

🟡 GPS से मिली सटीक जानकारी

सरकारी मानकों के अनुसार कैप्सूल में लगे GPS सिस्टम से पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि गैस का लीकेज नहीं हुआ, बल्कि उसे जानबूझकर अलग-अलग तारीखों में खाली किया गया।

विशेषज्ञों की राय में इतनी बड़ी मात्रा में गैस का लीकेज होना संभव नहीं है और सभी कैप्सूल तकनीकी रूप से सही पाए गए।

🔵 रिकॉर्ड में बड़ा अंतर

ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के कार्यालय से जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि:

अप्रैल माह में केवल 47 टन LPG गैस की खरीदी दिखाई गई

जबकि 107 टन LPG गैस की बिक्री दर्ज की गई

इससे यह स्पष्ट होता है कि लगभग 60 टन गैस ऐसी बेची गई जो आधिकारिक रिकॉर्ड में खरीदी नहीं गई थी।

🟣 कच्चे बिल और अवैध बिक्री का तरीका

जांच में यह भी सामने आया कि गैस की बिक्री कच्चे बिलों और कच्चे रजिस्टर के माध्यम से की जा रही थी।

रायपुर की कई एजेंसियों द्वारा इस गैस की खरीद कर उसे बाजार में खपाने में सहयोग किया गया।

🟤 वजन में देरी – साजिश का अहम पहलू

सुपुर्दनामे के समय या उसके तुरंत बाद कैप्सूल ट्रकों का वजन नहीं कराया गया।

सिंघोड़ा से अभनपुर तक लगभग 200 किलोमीटर की दूरी में कई धर्मकांटे उपलब्ध होने के बावजूद वजन नहीं कराया गया।

बाद में 6 से 8 अप्रैल के बीच, गैस खाली करने के बाद वजन कराया गया और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए।

गैस खाली करने की प्रक्रिया

कैप्सूल ट्रकों को प्लांट परिसर के पास खड़ा किया गया और वहां से गैस को चरणबद्ध तरीके से प्लांट के स्थिर बुलेट टैंक में भरा गया।

जब बुलेट टैंक भर गया तो गैस को निजी टैंकरों में स्थानांतरित किया गया और बाद में विभिन्न एजेंसियों को भेजा गया।

🔴 साक्ष्य नष्ट करने के प्रयास

जांच में यह भी सामने आया कि:

वाहन आवक-जावक रजिस्टर से छेड़छाड़ की गई

कच्चे लेन-देन के रजिस्टर गायब किए गए

दस्तावेजों को मिटाने और बदलने के प्रयास किए गए

इस आधार पर साक्ष्य नष्ट करने से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

🟢 धाराएं और कानूनी कार्रवाई

मामले में थाना सिंघोड़ा में विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है, जिनमें शामिल हैं:

BNS की धारा 316(3), 61, 238

आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act) 1955 की धारा 3 एवं 7

आईटी एक्ट की प्रासंगिक धाराएं

🟠 जप्त सामग्री

पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में निम्न सामग्री जब्त की गई:

7 LPG कैप्सूल टैंकर

4 बुलेट टैंक (प्रत्येक 21 टन क्षमता)

100 से अधिक कमर्शियल गैस सिलेंडर

कंप्यूटर CPU, CCTV DVR और मोबाइल

लेन-देन से संबंधित दस्तावेज, रजिस्टर और बिल

🔵 गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

इस मामले में अब तक एक आरोपी:

निखिल वैष्णव (41 वर्ष, अभनपुर, रायपुर) को गिरफ्तार किया गया है

अन्य आरोपी, जिनमें प्लांट मालिक और संबंधित व्यक्ति शामिल हैं, फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

🟡 निष्कर्ष

प्राथमिक जांच में यह मामला सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र, आपराधिक न्यास भंग, अवैध व्यापार और साक्ष्य से छेड़छाड़ से जुड़ा पाया गया है। पुलिस द्वारा मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।


Source : mahasamund police






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