पिथौरा के पोनी पसरा में सुना गया पीएम की ‘मन की बात’ का प्रसारण।

छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा’ अभियान की पीएम मोदी ने की सराहना।


पिथौरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 138वीं कड़ी का रविवार को पिथौरा के पोनी पसरा में सामूहिक श्रवण किया गया। सुबह 11 बजे प्रसारित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में जनभागीदारी से किए जा रहे सामाजिक कार्यों और पोषण के क्षेत्र में हो रही पहलों का उल्लेख किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ की ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ पहल विशेष रूप से चर्चा में रही।


पिथौरा में आयोजित कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष एवं रायगढ़ जिला प्रभारी भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा देवेश निषाद, जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष श्रीमती ऊषा पटेल, सांसद प्रतिनिधि एवं जिला कार्य समिति सदस्य मनमीत सिंह छाबड़ा, पार्षद मन्नूलाल ठाकुर, महिला पार्षद रामकुंवर सिन्हा, संतोष डड़सेना, एल्डरमैन नरेश सिंघल, एल्डरमैन किशोर पटेल, विधायक प्रतिनिधि मुन्नू पांडेय, वरिष्ठ भाजपा नेता रैदास गोयल, व्यापार प्रकोष्ठ प्रदेश कार्य समिति सदस्य मनमोहन जैन, वरिष्ठ नेता रमेश पटेल, इंद्रेश्वर सिन्हा, सरजू तिवारी, रमेश पटेल, श्रीमती अंजू सेनी, लीलाधर तारक, चंद्रपाल तारक, भूषण सिन्हा, हीरालाल निर्मलकर, दीपक सिन्हा, युवराज चौहान, डिगेश सोनवानी सहित वार्डवासी एवं अन्य जन उपस्थित थे।


कुपोषण के खिलाफ जनभागीदारी पर जोर


प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर माह को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई और बेहतर पोषण वाले भारत के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पोषण माह के दौरान देशभर में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग और संस्थाएं मिलकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है।


छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा’ अभियान की सराहना


‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में चल रहे ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से लोगों को मुनगा यानी मोरिंगा को अपने खान-पान में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मुनगा को पोषण से भरपूर स्थानीय संसाधन के रूप में रेखांकित किया।


छत्तीसगढ़ में मुनगा को घरों और पोषण वाटिकाओं से जोड़ने की पहल को प्रदेश में चल रहे पोषण अभियान से भी जोड़ा जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिका विकसित करने तथा ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ के लिए समुदाय को प्रेरित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।


गुजरात, महाराष्ट्र और मिजोरम की पहल का भी उल्लेख


प्रधानमंत्री ने गुजरात की मिलेट्स से बने व्यंजनों की प्रतियोगिता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य स्थानीय, सस्ते और पौष्टिक खान-पान को बढ़ावा देना है। महाराष्ट्र में शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और बच्चों के माता-पिता द्वारा मिलकर चलाए जा रहे जागरूकता प्रयासों की भी उन्होंने सराहना की।


इसी तरह मिजोरम में पोषण वाटिकाओं की देखभाल के लिए समुदाय की ओर से किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे वहां की निस्वार्थ सेवा की परंपरा से जोड़ा।


आंगनबाड़ी और तकनीक की भूमिका


प्रधानमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि ‘पोषण ट्रैकर’ के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्र डिजिटल रूप से जुड़े हैं और करीब 9 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत हो चुके हैं। इससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की बेहतर देखभाल में मदद मिलने की बात उन्होंने कही।


छत्तीसगढ़ में भी पोषण माह के दौरान बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और समुचित विकास को लेकर परिवारों को जागरूक किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के विकास की निगरानी, अभिभावकों को परामर्श और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।


पिथौरा के पोनी पसरा में उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना। छत्तीसगढ़ की पहल का राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री द्वारा उल्लेख किए जाने को उपस्थित लोगों ने प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। कार्यक्रम के दौरान पोषण, स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग और जनभागीदारी के माध्यम से कुपोषण के खिलाफ प्रयासों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।





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