महासमुंद में गूंजा 'श्री अन्न' का संदेश: पद्मश्री डॉ. खादर वली बोले— तीन महीने कोदो, कुटकी और रागी खाइए, बीमारियां रहेंगी दूर।

स्वस्थ जीवन, पोषण सुरक्षा और किसानों की समृद्धि का आधार हैं श्री अन्न (मिलेट्स): पद्मश्री डॉ. खादर वली।

महासमुंद, 2 अगस्त। जिले में श्री अन्न (मिलेट्स) के उत्पादन, उपयोग और जनजागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रविवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में "स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि के लिए श्री अन्न (मिलेट्स) एक वरदान हैं" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड, जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता देश के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एवं 'मिलेट्स मैन ऑफ इंडिया' पद्मश्री डॉ. खादर वली रहे। उन्होंने किसानों, जनप्रतिनिधियों एवं कृषि विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए कहा कि "श्री अन्न केवल एक अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, समृद्ध किसान और सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव है।"

उन्होंने कहा कि आज बदलती जीवनशैली, बढ़ती बीमारियों, जलवायु परिवर्तन और घटते जल संसाधनों के दौर में मिलेट्स सबसे उपयुक्त एवं टिकाऊ कृषि विकल्प बनकर उभरा है।

"तीन महीने कोदो, कुटकी और रागी खाइए, बीमारी खत्म हो जाएगी"



डॉ. खादर वली ने बताया कि वे कर्नाटक के मैसूर से हैं और पिछले 30 वर्षों से मिलेट्स पर लगातार शोध एवं कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग लगातार तीन महीने तक कोदो, कुटकी और रागी का नियमित सेवन करें, तो अनेक जीवनशैली संबंधी बीमारियों से राहत मिल सकती है।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि "अपने रसोईघर में पारंपरिक अनाजों का फिर से स्वागत कीजिए। हमारा उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को बीमारी से दूर रखना है। श्री अन्न ऐसा अनाज है, जो शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।"

पोषक तत्वों का खजाना है श्री अन्न

उन्होंने बताया कि कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार एवं बाजरा जैसे श्री अन्न में भरपूर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैग्नीशियम और अनेक सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनके नियमित सेवन से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग एवं पाचन संबंधी समस्याओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों के लिए भी यह अत्यंत लाभकारी है।



प्राकृतिक खेती अपनाएं, कम लागत में मिलेगा बेहतर मुनाफा

डॉ. खादर वली ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मिलेट्स की खेती कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। यह फसल सूखा एवं प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देती है। इससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है तथा रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है।

उन्होंने कहा कि विश्वभर में श्री अन्न की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसलिए किसान केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), मूल्य संवर्धन एवं स्थानीय स्तर पर मिलेट्स आधारित उद्यम स्थापित कर अतिरिक्त आय अर्जित करें।

सरकार किसानों के साथ, बीज भी मिलेगा और खरीदी भी होगी

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि राज्य सरकार मिलेट्स उत्पादन को लगातार बढ़ावा दे रही है। वहीं छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जाएंगे तथा उत्पादित फसल की खरीदी भी सुनिश्चित की जाएगी।

किसानों ने साझा किए अपने अनुभव

संवादात्मक सत्र में किसानों ने बीज चयन, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, प्रसंस्करण, विपणन एवं मूल्य संवर्धन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. खादर वली ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया।

भंवरपुर के प्रगतिशील किसान संत राम पटेल ने बताया कि वे रागी की खेती कर रहे हैं और अब तक लगभग 1000 क्विंटल रागी का उत्पादन कर चुके हैं। वहीं किसान महेंद्र चंद्राकर ने भी मिलेट्स उत्पादन के अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को कोदो की खिचड़ी एवं रागी की खीर परोसी गई, जिसकी सभी ने सराहना की। उपस्थित किसानों ने जिले में श्री अन्न का रकबा बढ़ाने तथा अपने दैनिक भोजन में मिलेट्स को शामिल करने का संकल्प भी लिया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अनुपमा आनंद, कृषि उप संचालक एफ.आर. कश्यप, जिला स्काउट गाइड संघ के अध्यक्ष येतराम साहू, जनपद सदस्य श्रीमती विजयलक्ष्मी जांगड़े, सांसद प्रतिनिधि महेंद्र जैन, प्रगतिशील किसान महेंद्र चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में किसान एवं कृषि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।









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